**नई दिल्ली, 4 जून 2025**: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्तावित महाभियोग को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए रिजिजू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर संसद में सभी राजनीतिक दलों के बीच एकजुटता और आम सहमति बनाने के लिए प्रयासरत है।
रिजिजू ने कहा, "यह मामला अत्यंत गंभीर है। न्यायपालिका या किसी भी क्षेत्र में भ्रष्टाचार से संबंधित चर्चा राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। हम सभी दलों से संपर्क कर रहे हैं ताकि संसद में इस मुद्दे पर एकजुटता स्थापित हो सके।" उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम न्यायपालिका की गरिमा और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए उठाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार आगामी मानसून सत्र में न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। रिजिजू ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह से संवैधानिक और पारदर्शी बताया और कहा कि यह कदम किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संस्थागत अखंडता को मजबूत करने के लिए है।
हालांकि, इस मामले में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा संसद में गहन बहस का कारण बन सकता है, क्योंकि महाभियोग की प्रक्रिया जटिल और संवेदनशील होती है।
रिजिजू ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में किसी भी संस्था को छूट नहीं दी जा सकती, चाहे वह न्यायपालिका हो या कोई अन्य क्षेत्र। उन्होंने जनता से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग न दिया जाए, बल्कि इसे एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए।
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